सजा देने के क्रूर तरीके 5वीं शताब्दी से चले आ रहे हैं। जब इंसानों के साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव होता था। उन्हें बीच से काटने के साथ लकड़ी के घोड़े पर बिठाकर, पैरो में वजन बांध दिया जाता है। आज भी सजा देने के क्रूर तरीकों में बदलाव नहीं हुआ है। अंतर सिर्फ इतना है कि शारीरिक तौर पर सजा देने की जगह अब मानसिक तौर पर अपराधियों पर ज्यादा परेशान किया जाता है। यहां हम आपको सजा देने के ऐसे ही कुछ साइकोलॉजिक तरीके बताने जा रहे हैं। कुछ का उपयोग अभी भी किया जाता है तो कुछ अब यूज नहीं किए जाते हैं। इस तरह अपराधी को करते हैं टॉर्चर...
स्ट्रेस पोजिशन
टॉर्चर की इस तकनीक में अपराधी की बॉडी और मसल्स पर वेट रखकर या उसके बिना अपराधी को किसी विशेष पोजिशन में खड़े रहने, झुकने पालथी मारकर बैठने को कहा जाता है। कभी-कभी उसे लोहे की बॉल या किसी दूसरी चीज पर खड़ा कर दिया जाता है। ऐसी अनकंफर्टेबल कंडीशन में रहने से आदमी को स्ट्रेस होने के साथ ही लॉन्ग टर्म पेन होता है। इस प्रकार का टॉर्चर यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री की जेलों में होता है।
म्यूजिक टॉर्चर
इसमें कैदी के सामने उसकी सहने की क्षमता से ज्यादा तेज म्यूजिक बजाया जाता है। स्पीकर को उसके कानों से बांध दिया जाता है। बहुत तेज म्यूजिक इंसान की अंदर जाकर उसकी हड्डियों को में कंपन पैदा करने के साथ ही उसे अंदर के सेंस खत्म होने लगते हैं। हाल ही में यूरोपियन कोर्ट और यूनाइटेड नेशन ने सवाल-जवाब के समय लाउड म्यूजिक का उपयोग करने पर रोक लगा दी है।
चाइनीज वॉटर टॉर्चर
इस टॉचर्र में अपराधी को अलग तरह से टॉर्चर किया जाता है। उसे फिजिकली चोट नहीं पहुंचाई जाती। उसे एक ऐसे नल के नीचे खड़ा कर दिया जाता है जहां से उसके ऊपर लगातार पानी की एक बूंद या तेजधार में पानी गिरता रहता है। सिर पर लगातार पानी गिरना फोर्स के साथ ही अलग तरह की मानसिक यंत्रणा है। ऐसा टॉर्चर 15वीं और 16वीं शदी में इटली में किया जाता था।
इस टॉचर्र में अपराधी को अलग तरह से टॉर्चर किया जाता है। उसे फिजिकली चोट नहीं पहुंचाई जाती। उसे एक ऐसे नल के नीचे खड़ा कर दिया जाता है जहां से उसके ऊपर लगातार पानी की एक बूंद या तेजधार में पानी गिरता रहता है। सिर पर लगातार पानी गिरना फोर्स के साथ ही अलग तरह की मानसिक यंत्रणा है। ऐसा टॉर्चर 15वीं और 16वीं शदी में इटली में किया जाता था।
दवाईयों से टॉर्चर करना
इस प्रकार का टॉर्चर मिडल ईस्ट में किया जाता है। जिसमें अपराधी को इंजेक्शन के द्वारा एडिक्टिव ड्रग्स दी जाती है। एक बार जब उसे इसकी लत लग जाती है, तो उसे ड्रग देना बंद कर दिया जाता है और सवाल-जवाब की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। अगर अपराधी मांगों को मान लेता तो उसे ड्रग वापस दे दी जाती है और अगर वह जानकारी नहीं देता तो टॉर्चर की प्रक्रिया जारी रहती है। ब्राजील में 70 के दशक में यह टॉर्चर किया जाता रहा है।
अकेला छोड़ देना
इस टॉर्चर में अपराधी को एक कमरे में अकेले बंद कर दिया जाता है। वह न तो कुछ कर सकता है ना ही कहीं जा सकता है। इससे डिप्रेशन और एंजाइटी होने लगती है। इसमें अपराधी लंबे समय तक नहीं रह पता।
व्हाइट टॉर्चर
व्हाइट टॉर्चर का उपयोग अपराधियों पर ईरान में किया जाता है। इसमें अपराधियों को अकेले छोड़ने के साथ उसके सेंसेस को प्रभावित किया जाता है। इसमें अपराधी को लाइट, साउंड, स्मेल, टच आदि से दूर कर दिया जाता है। इसमें कई बार अपराधी को एक व्हाइट रूम जिसमें विंडो भी नहीं होती बंद कर दिया जाता है। इस टॉर्चर का उपयोग अपराधी से कंफेशन करवाने और आतंकी के बारे में जानकारी निकलवाने के लिए उपयोग किया जाता है
डर से डराना
इस टॉर्चर में अपराधी जिससे सबसे ज्यादा डरता है उसी से डराया जाता है। जैसे अगर किसी को सांप से डर लगता है तो उसे सांप से भरे के कमरे में बंद कर दिया जाता है।
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